Master Plan Case in Jaipur: अधिकारियों ने एक बार फिर मिलकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए, राज्य भर में 7 लाख अवैध निर्माणों को वैध बनाने के लिए समझौता कर लिया है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए अधिकारियों ने राज्य के 7 लाख निर्माणों में से अवैध हिस्से को वैध करने के लिए कम्पाउंडिंग का इस्तेमाल करने की कोशिशें फिर से शुरू कर दी हैं। सुप्रीम कोर्ट फिलहाल मास्टर प्लान मामले में याचिका पर नए जवाब पर विचार कर रहा है। इसमें हाईकोर्ट के निर्देशों से छूट मांगने वाले बिंदुओं से जुड़े तथ्यों की विस्तृत व्याख्या की जाएगी। इसमें अवैध हिस्से को कम्पाउंड करने का भी बड़ा मामला है।
Master Plan Case in Jaipur: नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग को राज्य के प्रमुख शहरों से प्राप्त प्रारंभिक आकड़े

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग को राज्य के प्रमुख शहरों से प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार करीब सात लाख संपत्तियां कंपाउंडिंग के दायरे में हैं। सरकार के अनुसार, उन्हें फिलहाल उनकी पूर्व स्थिति में बहाल नहीं किया जा सकता, हालांकि, भविष्य में न्यायालय के आदेशों के अनुसार काम किया जाएगा। खास बात यह है कि हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान की अनुपालना के संबंध में 2017 और 2019 में व्यापक निर्देश जारी किए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है।
Master Plan Case in Jaipur: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करें
सुप्रीम कोर्ट की बेंच के जस्टिस पारदीवाला और आर माधव ने सरकारों को निर्देश दिया कि वे 17 दिसंबर, 2024 को कंपनियों और स्थानीय अधिकारियों को कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सर्कुलर भेजें। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आवासीय कॉलोनियों में अवैध रूप से, व्यावसायिक रूप से या मास्टर प्लान या जोनल प्लान का उल्लंघन करके किए जा रहे किसी भी निर्माण को तुरंत रोका जाए। नियमों के अनुसार, पानी, सीवेज और बिजली के कनेक्शन केवल संरचना के निर्माण के बाद ही दिए जाने चाहिए।
यह आदेश उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही जारी किया जा चुका है
- स्वीकृत योजना से अलग निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। भवन निर्माण आवश्यकताओं का सख्ती से पालन करना आवश्यक है।
- निर्माण जो भवन निर्माण आवश्यकताओं, जैसे कि सेटबैक, की अवहेलना करता है, उसे और खराब नहीं किया जाना चाहिए।
प्रशासन इन लोगों को राहत देने की मांग कर रहा है।
- यह इकोलॉजिकल जोन जमीन से 200 किलोमीटर की दूरी पर जुड़ा हुआ है। इस जमीन पर पहले लोग रहते थे। राजधानी जयपुर का इकोलॉजिकल एरिया अब करीब दो लाख लोगों का घर है।
- सरकारी मंजूरी के बाद पूरे राज्य में 25 किलोमीटर खुली जमीन पर लोगों ने अपना घर बना लिया है।
Master Plan Case in Jaipur: अधिकारियों का धोखा और मनमाना व्यवहार
मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के खिलाफ निर्माण के मामले में भी सरकार की धांधली सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में करीब 7 से 8 लाख अवैध निर्माण हैं, फिर भी उन्हें फिलहाल नहीं तोड़ा जा सकता, क्योंकि उनमें से ज्यादातर में आजीविका के साधन भी हैं। लेकिन, पूरे राज्य में इस तरह के निर्माणों को सील करने और तोड़ने का खेल चल रहा है। सरकार के दोहरे रवैये से लोगों को आश्चर्य हो रहा है कि सरकार कैसे काम करती है।
जुर्माना भरकर वैध बनने की प्रक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले से पहले ही निकाय, प्राधिकरण और यूआईटी जुर्माना लगाकर अवैध हिस्सों को वैध कर रहे थे। इससे अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद हो गए थे।