Natwar Singh Death | ‘मेरे निधन के बाद गांव में स्मारक बनाना’, पूर्व विदेश मंत्री ने थी जमीन

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Natwar Singh Death राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित जघीना गांव (Jaghina Village) के विकास और तरक्की में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। Natwar Singh Death उन्होंने गांव में न केवल पहली सड़क बनवाई बल्कि 10वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए एक स्कूल का भी निर्माण करवाया।

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Natwar Singh Death : शहीद स्मारक बनवाने के लिए जमीन खरीदी थी, विकास कार्य में भी विशेष योगदान रहा

Rajasthan News कांग्रेस सरकार में भारत के पूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवर का लंबी बीमारी के बाद 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका जन्म भरतपुर जिले (Bharatpur district) के जघीना गांव में हुआ था। उनके निधन की खबर सुनकर पूरा गांव शोक में है। लक्ष्मण सिंह (Laxman Singh) ने बताया कि नटवर सिंह को यह गांव बहुत पसंद था। वह गांव में बहुत सक्रिय रहते थे। वह स्वभाव से मिलनसार और हंसमुख थे। वह कभी किसी ग्रामीण को को किसी भी काम के लिए मना नहीं करते थे हैं।लक्ष्मण सिंह ने कहा, “नटवर सिंह ने अपने गांव में एक स्मारक बनाने के लिए छह बीघा जमीन खरीदी थी, जो कि उनकी मृत्यु के बाद की इच्छा थी।” उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था और उनके पास 10,000 से अधिक पुस्तकों की एक निजी लाइब्रेरी थी।

Natwar Singh Death

Natwar Singh Death : उन्हें 14 भाषाओं का ज्ञान था

नटवर सिंह 14 भाषाओं के विशेषज्ञ थे। वे दोनों हाथों से लिख सकते थे। उन्होंने गांव के विकास और वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।उन्होंने न केवल गांव की पहली सड़क बनवाई, बल्कि 10वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए एक स्कूल का निर्माण भी करवाया। लक्ष्मण सिंह के भतीजे चंद्रवीर सोगर जघीना ने बताया कि पूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवर सिंह ने “वन लाइफ इज नॉट इनफ: एन ऑटोबायोग्राफी (One Life is Not Enough: An Autobiography)” पुस्तक लिखी थी। इस किताब में विस्तार से बताया गया है कि 2004 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से क्यों मना कर दिया था। पीवी नरसिम्हा के साथ सोनिया गांधी के रिश्तों पर भी चर्चा हुई। कुंवर नटवर के बेटे कुंवर जगत नदबई विधानसभा से विधायक हैं।

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