UP by election 2024 यूपी में दस सीटों पर उपचुनाव होने हैं। सपा ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। UP by election 2024 अब उसे उपचुनाव में भी यही प्रदर्शन दोहराना होगा, ताकि साबित हो सके कि लोकसभा में उसके नतीजे ठोस रहे हैं। भाजपा इन उपचुनावों के जरिए लोकसभा से पैदा हुए भ्रम को तोड़ सकती है और अपने कार्यकर्ताओं में जोश भर सकती है।सात राज्यों की 13 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा नीत एनडीए (NDA) की बेचैनी बढ़ा दी है, जो पहले से ही लोकसभा चुनाव में अपेक्षित नतीजे न मिलने से परेशान है। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में दस विधानसभा सीटों पर (in ten assembly seats) उपचुनाव होंगे। इनमें से पांच सीटें अभी एनडीए के पास हैं, जबकि पांच सपा के पास हैं।
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UP by election 2024: क्या बचा पाएगी विधानसभा उपचुनाव में अपनी साख
samajwadi party भाजपा के सामने लोकसभा चुनाव में मिली हार से उबरने और संगठन को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है। सीटों का समीकरण भी उतना ही पेचीदा है। इस बार उत्तर प्रदेश के फूलपुर और खैर (Phulpur and Khair) के साथ ही गाजियाबाद, मझवां, मीरापुर मिल्कीपुर करहल कटेहरी, कुंदरकी से विधायक इसी लोकसभा चुनाव में जीतकर सांसद बने हैं। इस तरह नौ सीटें खाली हो गईं और 10वीं सीट सीसामऊ (Seat Sisamau) से सपा सांसद इरफान सोलंकी पर आपराधिक मामले में मुकदमा चलने के कारण उनकी सदस्यता रद्द होने से खाली हुई है।
हालांकि अभी उपचुनाव की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सपा और सत्तारूढ़ भाजपा ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सपा ने लोकसभा चुनाव में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया, लेकिन अब यह साबित करना उनके ऊपर है कि लोकसभा में उनके नतीजे ठोस आधार पर हैं।भाजपा इन उपचुनावों का इस्तेमाल अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने और लोकसभा में बनी धारणा को तोड़ने के लिए कर सकती है। हालांकि इन सीटों के समीकरण भाजपा के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा रहे हैं। दरअसल, ऐसा लग रहा है कि सपा की अपनी पांच सीटों पर मजबूत पकड़ है।

UP by election 2024: बीजेपी को विधानसभा उपचुनाव में उठाना पड़ सकता है नुकसान
UP politics सपा प्रमुख अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल सीट से विधायक थे। यह सीट सपा का अभेद्य किला माना जाता है। जियाउर्रहमान बर्क मुरादाबाद के कुंदरकी से विधायक रहे। उनके लिए इस मुस्लिम बहुल सीट को सपा से छीनना आसान नहीं है। लालजी वर्मा अंबेडकर नगर के कटेहरी से दो बार के विजयी सांसद हैं। वह सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं।
उनके प्रभाव को रोकने के लिए भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी होगी। फैजाबाद लोकसभा सीट (Faizabad Lok Sabha Seat) के अंतर्गत आने वाली मिल्कीपुर विधानसभा सीट भी चर्चा में कानपुर सीसामऊ सीट से तीन बार सपा विधायक रहे इरफान सोलंकी। 2022 में सपा की जीत का अंतर भी 2017 से ज्यादा रहा। इस क्षेत्र में भाजपा के लिए अतिरिक्त सीटें जीतने की संभावनाएं सीमित नजर आ रही हैं, लेकिन उसके लिए पांच सीटें बचाने की चुनौती अभी भी बनी हुई है। गाजियाबाद, खैर और प्रयागराज (Prayagraj) की फूलपुर सीटों पर भाजपा के लिए लड़ाई आसान होगी लेकिन मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) की मीरापुर उतनी आसान नहीं है।